SOUTH-SOUTH | July 2026
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22 August 2022 | 5 pm to 7 pm | Constitution Club, Rafi Marg, New Delhi 110001 Joshi-Adhikari Institute of Social Studies (JAISS) in collaboration with ActionAid India and Aakar Books organized a book release function and a discussion on the book titled – “From the realm of the necessity to the realm of freedom” written by Jaya Mehta and Vineet Tiwari and published by Aakar Books. The event was held at the Constitution Club on 22nd August 2022. Jaya…
(केरल की महिला किसानों द्वारा की जा रही साझा खेती का अध्ययन) पिछले दिनों एक पुस्तक का विमोचन दिल्ली के कंस्टीटूशन क्लब में हुआ जिसका शीर्षक है “फ्रॉम दि रील्म ऑफ़ नेसेसिटी टु दि रील्म ऑफ़ फ्रीडम”। पुस्तक का विमोचन किया केरल के कुडम्बश्री कार्यक्रम के पहले कार्यकारी निदेशक टी के जोस, भारतीय महिला फेडरेशन की राष्ट्रीय अध्यक्ष और मजदूर किसान शक्ति संगठन की संस्थापिका अरुणा रॉय, भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) के महासचिव और राज्यसभा के पूर्व सांसद कॉमरेड…
रूस और यूक्रेन दोनों जुड़वा देश रहे हैं। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद यूक्रेन सोवियत संघ में शामिल हुआ। सन 1990 में रूस से अलग होने के बाद से ही अमेरिका यूक्रेन सहित सोवियत संघ से अलग हुए देशों में अपनी कठपुतली सरकारें बिठाने का षड्यंत्र करता रहा है। इस क्षेत्र में अमेरिका की बढ़ती दखलंदाजी को रूस अपने लिए खतरा मानता है। पश्चिम का पूंजीवादी मीडिया रूस को आक्रमणकारी और साम्राज्यवादी देश प्रचारित कर रहा है। इस बीच नाटो…
‘किसान का कोड़ा’ विचारगोष्ठी की रपट. रपट : बजरंग बिहारी. इन संगठनों से जुड़े लेखक, बुद्धिजीवी, कलाकार और रचनाकार किसान आंदोलन पर कार्यक्रमों की शृंखला चला रहे हैं। इसी सिलसिले में 11 अप्रैल 2021 को महात्मा फुले की जयंती के अवसर पर ‘किसान आंदोलन के समक्ष चुनौतियां’ ऑनलाइन विचार-गोष्ठी का आयोजन किया गया। यह आयोजन जोतिबा फुले की सुप्रसिद्ध रचना ‘किसान का कोड़ा’ को समर्पित था। कार्यक्रम में तीन वक्ता थे- वरिष्ठ कृषि अर्थशास्त्री जया मेहता, कथाकार-विचारक रणेन्द्र और अखिल भारतीय किसान…
रिपोर्ट: राहुल भाईजी. भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की मध्यप्रदेश इकाई द्वारा “भारत में स्वास्थ्य सेवाओं के राष्ट्रीयकरण” विषय पर एक वेबिनार का आयोजन किया गया। वेबिनार का संयोजन जोशी अधिकारी इंस्टीट्यूट आफ सोशल स्टडीज द्वारा किया गया। वेबिनार में डॉ अभय शुक्ला (पुणे) राष्ट्रीय सहसंयोजक, जन स्वास्थ्य अभियान, ने अपनी बात रखते हुए कहा कि वर्ष 1986-87 में भारत की सरकारी स्वास्थ्य सेवाएं निजी क्षेत्र की तुलना में ज्यादा थी, और 1000 मरीज में 400 मरीज ही निजी स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ…
– विनोद कोष्टी. हाल में संयुक्त राष्ट्र संघ ने इज़राएल की एक आपत्ति पर फ़िलिस्तीनियों के लिए काम करने वाले एक गै़र सरकारी संगठन के सलाहकार संगठन होने के आवेदन को निरस्त कर दिया। जब इस मामले पर मत संग्रह हुआ तो पहली बार भारत ने फ़िलिस्तीन के ख़िलाफ़ इज़राएल के पक्ष में अपना मत दिया। इस घटना के सन्दर्भ में जोशी-अधिकारी इंस्टिट्यूट ऑफ़ सोशल स्टडीज़ और अखिल भारतीय शांति एवं एकजुटता संगठन ने संयुक्त रूप से 17 जून, 2019…
by S.P. Shukla, Jaya Mehta, Vineet Tiwari. This article was written quite some time ago before the ‘Delhi Chalo’ movement of farmers in December 2018. In the introduction of the article the authors explained: “We wish to present this paper for the consideration of and interaction with peasants, activists, scholars and indeed the entire ‘Nation For Farmers’ which is being mobilised as part of the magnificent Delhi Chalo Movement of Farmers.” “We have been engaged, for more than a decade…
How Neoliberalism could be inclusive at all? Why the features of current regime doesn’t classify it to be a case of Fascism rathwer than qualifying it as “Authoritarian Populism?” What are the major differences in the UPA and NDA governements, how Indian polity has changed since 2004 and what are the prospects for a pro people political regime in 2019? All these questions were addressed and discussed during a thought provoking and engaging talk by Alf Nilsen in SIS, JNU today….